टेक रेगुलेशन बिल को लगा बड़ा झटका, पॉलिटिकल टेंशन हाई!
टेक कंपनीज़ को रेगुलेट करने वाले एक बड़े बिल को कांग्रेस में अचानक झटका लगा है। दोनों पार्टीज़ के बीच कुछ प्रोविजन्स पर एग्रीमेंट नहीं हो पा रहा है, जिससे बिल का फ्यूचर अनसर्टेन लग रहा है।
एक बहुत इम्पोर्टेंट बाइपार्टिसन बिल, जिसका मकसद बड़े टेक जायंट्स की पावर को कंट्रोल करना था, अब सीनेट में बड़े प्रॉब्लम्स फेस कर रहा है। इससे इसके लॉ बनने की पॉसिबिलिटी कम हो गई है। नेगोशिएशन्स से जुड़े सोर्सेज का कहना है कि डेटा प्राइवेसी क्लॉजेज और इन्फोर्समेंट मैकेनिज्म पर अचानक डिसएग्रीमेंट हो गया है, जिससे उन सेनेटर्स के बीच भी दरार आ गई है जो पहले इस लेजिस्लेशन पर साथ थे।
यह बिल, जिसे पहले दोनों पार्टीज़ का सपोर्ट मिला था, ऐप स्टोर प्रैक्टिसेज, डेटा कलेक्शन और एंटी-कंपिटिटिव बिहेवियर्स पर स्ट्रिक्ट रेगुलेशंस लाने वाला था। इसके सपोर्टर्स का कहना था कि यह एक फेयर डिजिटल मार्केटप्लेस बनाने और कंज्यूमर राइट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए बहुत ज़रूरी था। लेकिन, कुछ लॉबीइंग ग्रुप्स के लेट-स्टेज पुश और कुछ लॉमेकर्स की बिल के स्कोप को लेकर जेनुइन कंसर्न्स ने इसके पास होने को कॉम्प्लिकेटेड बना दिया है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर ये डिसएग्रीमेंट्स जल्दी सॉल्व नहीं हुए, तो बिल पूरी तरह से कोलैप्स हो सकता है, जिससे टेक इंडस्ट्री आगे भी अनरेगुलेटेड रह सकती है। व्हाइट हाउस ने लॉमेकर्स से कॉमन ग्राउंड ढूंढने की अपील की है, और कहा है कि तेजी से बदलते डिजिटल लैंडस्केप में टेक ओवरसाइट को मॉडर्नाइज करना कितना इम्पोर्टेंट है। डिस्कशन अभी जारी हैं और आउटकम अनसर्टेन है।