आर्कटिक आइस मेल्ट तेज़ी से बढ़ी, इमरजेंसी ग्लोबल समिट बुलाई गई
वर्ल्ड लीडर्स ने अगले हफ्ते एक इमरजेंसी समिट बुलाई है, क्योंकि नए डेटा से पता चला है कि आर्कटिक की आइस मेल्ट पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से हो रही है। साइंटिस्ट्स ने वॉर्न किया है कि अगर तुरंत एक्शन नहीं लिया तो सीरियस ग्लोबल इम्प्लिकेशन्स होंगे, जैसे सी लेवल का बढ़ना और एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स।
इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की एक नई रिपोर्ट के बाद अगले हफ्ते के लिए एक अर्जेंट ग्लोबल समिट अनाउंस की गई है। इस रिपोर्ट में आर्कटिक आइस मेल्ट की अनप्रेसिडेंटेड रेट्स सामने आई हैं। डेटा से पता चलता है कि क्रिटिकल टिपिंग पॉइंट्स पहले की प्रेडिक्शंस से कहीं ज़्यादा जल्दी रीच हो सकते हैं, जिससे एनवायरनमेंटल साइंटिस्ट्स और पॉलिसीमेकर्स में टेंशन बढ़ गई है।
IPCC के एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस तेज़ मेल्टिंग से कई सीरियस थ्रेट्स हैं, जैसे ग्लोबल सी लेवल्स का ज़्यादा तेज़ी से बढ़ना, ओशनिक करेंट्स का डिस्टरबेंस, और कॉन्टिनेंट्स में एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स का बढ़ना। रिफ्लेक्टिव आइस के लॉस का मतलब है कि ओशन ज़्यादा सोलर एनर्जी अब्सॉर्ब करेगा, जिससे वार्मिंग और बढ़ेगी।
आने वाली समिट का मकसद एक अग्रेसिव, कोऑर्डिनेटेड इंटरनेशनल रिस्पांस तैयार करना है, जिसमें स्ट्रिक्टर एमिशन टारगेट्स और इमीडिएट कंजर्वेशन एफर्ट्स पर फोकस होगा। लीडर्स पर कंक्रीट एक्शन प्लान्स डिलीवर करने का बहुत प्रेशर है, क्योंकि क्लाइमेट चेंज के सबसे कैटास्ट्रॉफिक इम्पेक्ट्स को कम करने का टाइम तेज़ी से कम हो रहा है।