वर्ल्ड लीडर्स की इमरजेंसी समिट, क्लाइमेट क्राइसिस पर साथ लड़ने का प्रॉमिस
आज एक इमरजेंसी ग्लोबल समिट खत्म हुई, जिसमें 100 से ज्यादा देशों के लीडर्स ने क्लाइमेट क्राइसिस से लड़ने के लिए साथ काम करने का प्रॉमिस किया। मेन एग्रीमेंट्स में रिन्यूएबल एनर्जी में ट्रांजिशन को तेज करना और 2030 तक कार्बन एमिशन को कम करना शामिल है।
जेनेवा में हुई "समिट फॉर अ सस्टेनेबल फ्यूचर" में पिछले तीन दिनों से हेड ऑफ स्टेट और एनवायरनमेंट मिनिस्टर्स ने सीरियस डिस्कशंस किए। "जेनेवा अकॉर्ड" में एम्बिशियस टारगेट्स हैं, जिसमें ग्रीन टेक्नोलॉजीज में बिलियंस इन्वेस्ट करने और अगले पांच सालों में फॉसिल फ्यूल सब्सिडीज को खत्म करने का कलेक्टिव प्रॉमिस शामिल है।
डेलीगेट्स ने सिचुएशन की अर्जेंसी पर जोर दिया, हाल की एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स और बढ़ती ग्लोबल टेंपरेचर्स को डेंजर में प्लैनेट के क्लियर इंडिकेटर्स बताया। कई डेवलपिंग नेशंस को भी वेल्दियर कंट्रीज से फाइनेंशियल और टेक्नोलॉजिकल असिस्टेंस का कमिटमेंट मिला है ताकि वे क्लाइमेट चेंज के इम्पैक्ट्स से अडैप्ट कर सकें और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को इम्प्लीमेंट कर सकें।
भले ही इस अकॉर्ड को एक बड़ा स्टेप फॉरवर्ड माना जा रहा है, लेकिन एनवायरनमेंट एडवोकेसी ग्रुप्स और भी एग्रेसिव एक्शन की डिमांड कर रहे हैं। वे कहते हैं कि प्रॉमिसेज को ग्लोबल वार्मिंग के अगेंस्ट फाइट में रियल प्रोग्रेस में बदलने के लिए स्ट्रॉन्ग इम्प्लीमेंटेशन और अकाउंटेबिलिटी बहुत जरूरी है।