ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी अलायंस का बड़ा एक्शन, रैंसमवेयर गैंग्स पर स्ट्राइक
दुनिया भर के कई देशों ने मिलकर एक नया साइबरसिक्योरिटी अलायंस बनाया है। उन्होंने बड़े रैंसमवेयर गैंग्स के खिलाफ एक साथ एक्शन लेने का अनाउंसमेंट किया है। ये साइबरक्राइम के खिलाफ ग्लोबल फाइट में एक बड़ा स्टेप है।
जिनेवा – एक बहुत बड़े मूव में, 'डिजिटल शील्ड अलायंस' नाम के एक ग्रुप ने, जिसमें अमेरिका, यूके, जर्मनी और जापान जैसे 12 से ज्यादा देश शामिल हैं, ने दुनिया भर में एक्टिव कुछ बड़े रैंसमवेयर गैंग्स के खिलाफ एक बड़ा एक्शन अनाउंस किया है। इस अलायंस का गोल इन क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशंस के फाइनेंशियल और ऑपरेशनल नेटवर्क्स को खत्म करना है, जिन्होंने दुनिया भर की कंपनीज और इंपॉर्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से करोड़ों रुपये एक्सटॉर्ट किए हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस इनिशिएटिव को अनाउंस करते हुए, रिप्रेजेंटेटिव्स ने बताया कि इस एक्शन में इंटेलिजेंस शेयरिंग, जॉइंट लॉ एनफोर्समेंट ऑपरेशंस और टेक्निकल मेजर्स को एक साथ यूज किया जाएगा ताकि इन ग्रुप्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को न्यूट्रलाइज किया जा सके। इसमें उनके कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वर्स, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स और रिक्रूटमेंट चैनल्स को टारगेट करना शामिल है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि साइबरक्राइम के इंटरनेशनल नेचर को देखते हुए ये इंटीग्रेटेड अप्रोच बहुत इंपॉर्टेंट है।
ये मूव पिछले साल रैंसमवेयर अटैक्स में हुई बढ़ोतरी के बाद आया है, जिसने हॉस्पिटल्स, गवर्नमेंट एजेंसीज और सप्लाई चेन्स को बहुत नुकसान पहुंचाया है। अलायंस के लीडर्स ने कहा कि वे साइबर क्रिमिनल्स को अकाउंटेबल ठहराने और ग्लोबल डिजिटल सिस्टम्स को और स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए कमिटेड हैं। यह अनप्रेसीडेंटेड कोलैबोरेशन इंटरनेशनल साइबरसिक्योरिटी एफर्ट्स में एक नए एरा की शुरुआत है, जिसमें सिर्फ डिफेंस नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव डिसरप्शन पर भी फोकस है।