वर्ल्ड लीडर्स क्लाइमेट चेंज पर नहीं बना पाए कंसेंसस, इमरजेंसी समिट फेल
क्लाइमेट चेंज पर एक्शन तेज करने के लिए बुलाई गई इमरजेंसी समिट मिक्सड रिजल्ट्स के साथ खत्म हुई। बड़ी कंट्रीज नए टारगेट्स पर एग्री नहीं कर पाईं।
वर्ल्ड लीडर्स आज एक इमरजेंसी क्लाइमेट समिट के लिए मिले थे, उम्मीद थी कि एमिशन कम करने के इम्पोर्टेंट टारगेट्स पर जो डेडलॉक है वो खत्म होगा। लेकिन, इंटेंस नेगोशिएशन्स के बाद भी, समिट में कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हुआ, जिससे कई एनवायर्नमेंटल एक्टिविस्ट्स डिसअपॉइंटेड हैं। खास तौर पर फॉसिल फ्यूल्स पर डिपेंडेंट बड़ी इंडस्ट्रियल कंट्रीज ने ज्यादा एम्बिशियस कमिटमेंट्स की कॉल्स को रिजेक्ट कर दिया, इकोनॉमिक रीजन्स देते हुए।
एक यूनिफाइड फ्रंट न होने से छोटे आइलैंड नेशन्स और डेवलपिंग कंट्रीज में फ्रस्ट्रेशन है, जो क्लाइमेट चेंज के इम्पैक्ट से सबसे ज्यादा इफेक्टेड हैं। उन्होंने सिचुएशन की अर्जेंसी पर जोर दिया, राइजिंग सी लेवल्स, एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स और फूड इनसिक्योरिटी के सॉलिड एविडेंस पेश किए। समिट का फाइनल डिक्लेरेशन एक कॉम्प्रोमाइज जैसा लगा, जिसमें कंक्रीट, बाइंडिंग टारगेट्स की बजाय वेग प्रॉमिसेज़ थे।
UN सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने अपना डिसअपॉइंटमेंट एक्सप्रेस किया और कंट्रीज से अपील की कि वे अपनी पोजीशन्स को फिर से कंसीडर करें इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। एक्सपर्ट्स वार्न कर रहे हैं कि इमीडिएट और ड्रास्टिक एक्शन के बिना, वर्ल्ड अपने पेरिस एग्रीमेंट गोल्स को मिस कर देगा, जिसके इकोसिस्टम्स और ह्यूमन पॉपुलेशंस के लिए कैटास्ट्रॉफिक कॉन्सीक्वेंसेस हो सकते हैं।