गवर्नमेंट ने नया क्लाइमेट बिल इंट्रोड्यूस किया, ऑपोज़िशन ने किया वॉकआउट!
पार्लियामेंट में आज एक नया क्लाइमेट चेंज बिल इंट्रोड्यूस हुआ है, जिसका मेन गोल अगले दस सालों में कार्बन एमिशन्स कम करना है। इस बिल पर ऑपोज़िशन पार्टीज ने वॉकआउट किया, इकोनॉमिक इम्पैक्ट और फिजिबिलिटी पर सवाल उठाए हैं।
एनवायरनमेंट मिनिस्टर ने आज सुबह 'ग्रीन फ्यूचर एक्ट' पार्लियामेंट में पेश किया, जिसमें इंडस्ट्रीज के लिए स्ट्रिक्ट न्यू रेगुलेशंस और रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ एक बड़ा पुश शामिल है। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो नेशन 2035 तक ग्रीनहाउस गैस एमिशन्स में 50% की कमी लाने के लिए कमिटेड होगा, जिसे एनवायरनमेंटल ग्रुप्स ने एम्बिशियस लेकिन ज़रूरी बताया है।
लेकिन, इस बिल के इंट्रोड्यूस होते ही मेन ऑपोज़िशन ब्लॉक ने तुरंत और ज़ोरदार अपोज़िशन दिखाया। लीडर्स ने कहा कि बिल के प्रोविज़न्स बहुत ज़्यादा अग्रेसिव हैं और इकोनॉमी के की सेक्टर्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे जॉब लॉस और इंडस्ट्रियल ग्रोथ में स्लोडाउन आ सकता है। उन्होंने एक डीटेल्ड कंसल्टेशन प्रोसेस और एक रिवाइज्ड प्रपोजल की डिमांड की, जो एनवायरनमेंटल गोल्स को इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के साथ बैलेंस कर सके।
पॉलिटिकल एनालिस्ट्स का मानना है कि यह बिल अपकमिंग पार्लियामेंट्री सेशन में एक बड़ा बैटलग्राउंड बनने वाला है। दोनों साइड्स अपनी बात पर अड़े हुए हैं, इसलिए इसे पास कराने का रास्ता मुश्किल लग रहा है, जिससे आने वाले हफ्तों में काफी पॉलिटिकल मैन्यूवरिंग और कॉम्प्रोमाइज़ेज़ देखने को मिल सकते हैं। पब्लिक ओपिनियन अभी भी डिवाइडेड है, जो एनवायरनमेंटल अर्जेंसी और इकोनॉमिक कंसर्न्स के कॉम्प्लेक्स इंटरप्ले को दिखाता है।