गवर्नमेंट का नया क्लाइमेट एक्ट पार्लियामेंट में गरमाया, ऑपोजिशन ने उठाए सवाल!
गवर्नमेंट का नया क्लाइमेट चेंज मिटिगेशन एक्ट पार्लियामेंट में डिबेट का मेन पॉइंट बन गया है। ऑपोजिशन पार्टीज़ ने इस बिल के कई प्रोविजन्स पर सीरियस सवाल उठाए हैं, जिससे पॉलिटिक्स में काफी गरमाहट आ गई है।
गवर्नमेंट का प्रपोज़्ड क्लाइमेट चेंज मिटिगेशन एक्ट, जो उनकी पॉलिसी का एक मेन पार्ट है, पार्लियामेंट में डिबेट के क्रूशियल फेज़ में आ गया है। इस बिल का टारगेट कार्बन एमिशन कम करना और रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज को प्रमोट करना है। लेकिन, ऑपोजिशन पार्टीज़ ने इस पर काफी अपोज़ किया है, उनका कहना है कि कुछ क्लाउज़ेज़ इंडस्ट्रीज़ और लोगों के लाइवलीहुड को गलत तरीके से इफेक्ट कर सकते हैं।
ऑपोजिशन के लीडर्स का कहना है कि बिल में इंप्लीमेंटेशन का कोई क्लियर रोडमैप नहीं है और इससे इकोनॉमी में बड़ा डिस्टर्बेंस आ सकता है, खासकर अगर ट्रांजिशनिंग इंडस्ट्रीज़ को सपोर्ट न मिले। उन्हें स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) पर फाइनेंशियल बर्डन और ट्रेडिशनल सेक्टर्स में जॉब लॉस की टेंशन है। वहीं, गवर्नमेंट के स्पोक्सपर्सन्स का कहना है कि यह एक्ट सस्टेनेबल फ्यूचर के लिए बहुत ज़रूरी है और इसमें ग्रीन सब्सिडीज़ और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के प्रोविजन्स भी हैं।
आज के सेशन में रूलिंग और ऑपोजिशन मेंबर्स के बीच काफी तीखी बहस हुई, जिसमें अमेंडमेंट्स और आगे की कंसल्टेशंस की डिमांड की गई। इस डिबेट का आउटकम सिर्फ नेशन की एनवायर्नमेंटल पॉलिसी को ही नहीं, बल्कि गवर्नमेंट की क्रिटिकल नेशनल इश्यूज़ पर कंसेंसस बनाने की एबिलिटी को भी टेस्ट करेगा। पॉलिटिकल एनालिस्ट्स का प्रेडिक्शन है कि बिल के लिए आगे की राह काफी टफ होगी और लॉ बनने से पहले इसमें बड़े रिविजन्स हो सकते हैं।