गवर्नमेंट ने नया डिजिटल राइट्स बिल किया अनाउंस, प्राइवेसी पर सवाल
गवर्नमेंट ने आज एक नया डिजिटल राइट्स बिल इंट्रोड्यूस किया है, जिसका मकसद ऑनलाइन कंटेंट और यूजर डेटा को रेगुलेट करना है। लेकिन, प्राइवेसी एडवोकेट्स और अपोजिशन पार्टीज़ ने इस पर सवाल उठाए हैं, जिससे एक नेशनवाइड डिबेट शुरू हो गई है।
काफी समय से जिस डिजिटल राइट्स बिल पर डिबेट चल रही थी, उसे आज पार्लियामेंट में ऑफिशियली टेबल किया गया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और यूजर डेटा को रेगुलेट करने की तरफ एक बड़ा स्टेप है। गवर्नमेंट का कहना है कि यह बिल नेशनल सिक्योरिटी और ऑनलाइन हार्म से सिटीजन्स को प्रोटेक्ट करने के लिए बहुत ज़रूरी है।
लेकिन, इस बिल पर तुरंत ही कई सिविल सोसाइटी ग्रुप्स और अपोजिशन लीडर्स ने सवाल उठा दिए हैं। मेन कंसर्न्स उन प्रोविजन्स को लेकर हैं, जिनसे गवर्नमेंट को ज़्यादा सर्विलांस की पावर मिल सकती है और ऑनलाइन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन लिमिट हो सकती है। प्राइवेसी एडवोकेट्स ने वार्न किया है कि बिल की कुछ लैंग्वेज का मिसयूज हो सकता है, जिससे डिजिटल डिसेंट पर नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ेगा।
आने वाले हफ्तों में पार्लियामेंट में इस पर इंटेंस डिबेट और पब्लिक डिस्कशंस होने की उम्मीद है। गवर्नमेंट ने अमेंडमेंट्स पर विचार करने की बात कही है, लेकिन इस लेजिस्लेशन की ज़रूरत पर जोर दिया है ताकि एक सेफ और रेगुलेटेड डिजिटल इकोसिस्टम बन सके। इस लेजिस्लेटिव बैटल का आउटकम देश में डिजिटल राइट्स के फ्यूचर को ज़रूर अफेक्ट करेगा।