नया क्लाइमेट बिल कांग्रेस में फंसा, दोनों पार्टीज़ में टेंशन
एक नया, बायपार्टीशन क्लाइमेट चेंज बिल, जो नेशनल एनर्जी पॉलिसी को चेंज करने वाला है, कांग्रेस में मुश्किल में है। पहले तो सब पॉजिटिव थे, पर अब पार्टीज़ में काफी डिफरेंस आ गए हैं, जिससे ये बिल पास होना मुश्किल लग रहा है।
एक बड़ा बायपार्टीशन बिल, जिसे क्लाइमेट चेंज से डील करने और रिन्यूएबल एनर्जी में इन्वेस्ट करने के लिए बनाया गया था, कांग्रेस में अटक गया है। नेगोशिएशंस से जुड़े सोर्सेज बताते हैं कि पहले तो सब ठीक चल रहा था, पर अब कुछ मेन पॉलिसी पॉइंट्स पर डिफरेंस आ गए हैं, खासकर फेडरल रेगुलेशंस और ग्रीन टेक्नोलॉजीज़ के लिए इंसेटिव्स को लेकर।
ये बिल, जिसे दोनों पार्टीज़ के मॉडरेट सेनेटर्स ने सपोर्ट किया है, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजीज़ और फॉसिल फ्यूल्स से धीरे-धीरे हटने के लिए कई बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट का प्रपोजल रखता है। सपोर्टर्स का कहना है कि ये इंटरनेशनल क्लाइमेट कमिटमेंट्स पूरे करने और ग्रीन सेक्टर्स में इकोनॉमिक ग्रोथ लाने के लिए बहुत ज़रूरी है।
पर, कुछ कंज़र्वेटिव ग्रुप्स को ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज़ पर इसके इकोनॉमिक इम्पैक्ट और गवर्नमेंट के इंटरवेंशन को लेकर टेंशन है। वहीं, प्रोग्रेसिव ग्रुप्स और भी स्ट्रॉन्ग टारगेट्स और स्ट्रिक्ट एनफोर्समेंट मैकेनिज्म की डिमांड कर रहे हैं, जिससे महीनों की बातचीत के बाद बना ये कॉम्प्रोमाइज़ अब टूटने के कगार पर है।