टेक जायंट 'इनोवेटकॉर्प' के स्टॉक्स में भारी गिरावट, रेगुलेटरी टेंशन बढ़ी
लीडिंग टेक फर्म इनोवेटकॉर्प के शेयर्स आज 15% से ज्यादा गिर गए हैं, जब ये न्यूज़ आई कि फेडरल रेगुलेटर्स ने उनकी एंटीट्रस्ट इन्वेस्टिगेशन तेज़ कर दी है। इन्वेस्टर्स को डर है कि कंपनी पर भारी फाइन लग सकता है और उसके ऑपरेशंस पर रेस्ट्रिक्शन्स लग सकते हैं, जिससे फ्यूचर ग्रोथ पर बहुत असर पड़ेगा।
इनोवेटकॉर्प, जो कभी स्टॉक मार्केट की फेवरेट कंपनी थी, उसकी वैल्यूएशन में आज बहुत गिरावट आई है। यह तब हुआ जब डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने कंपनी के कॉम्पिटिटिव प्रैक्टिसेज की अपनी जाँच को और बढ़ा दिया। यह इन्वेस्टिगेशन, जो पहले छोटे डेटा प्राइवेसी इश्यूज पर फोकस थी, अब मोनोपोलिस्टिक बिहेवियर और अनफेयर मार्केट डोमिनेंस के एलिगेशन्स को भी कवर कर रही है।
एनालिस्ट्स का कहना है कि यह सिर्फ एक टेम्परेरी गिरावट नहीं है, बल्कि एक बड़ा चैलेंज है जो इनोवेटकॉर्प के बिजनेस मॉडल को बदल सकता है। कंपनी के मैंडेटेड ब्रेकअप या सीवियर ऑपरेशनल लिमिटेशन्स की पॉसिबिलिटी ने टेक सेक्टर में शॉकवेव्स भेज दी हैं, जिससे बाकी बड़ी टेक कंपनीज के स्टॉक्स में भी सेल-ऑफ हुआ है।
कंपनी के एग्जीक्यूटिव्स ने एक स्टेटमेंट जारी कर अथॉरिटीज के साथ फुल कोऑपरेशन और अपनी लीगल कंप्लायंस में कॉन्फिडेंस जताया है। लेकिन, मार्केट रिएक्शन इन्वेस्टर्स के बीच गहरी चिंताओं को दिखाता है कि यह केस दूसरे टेक जायंट्स के लिए क्या प्रेसिडेंट सेट कर सकता है। अगले कुछ मंथ्स बहुत क्रूशियल होंगे क्योंकि इनोवेटकॉर्प इस कॉम्प्लेक्स लीगल और पब्लिक रिलेशन्स बैटल को फेस करेगी।