नया 'डिजिटल ओवरसाइट बिल' पार्लियामेंट में बना बड़ी टेंशन, ऑपोजिशन ने किया वॉकआउट!
सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने वाला एक नया बिल पार्लियामेंट में बड़ी बहस का टॉपिक बन गया है। ऑपोजिशन का कहना है कि ये फ्री स्पीच के लिए खतरा है और गवर्नमेंट को बहुत ज्यादा पावर देगा।
न्यू दिल्ली: रूलिंग पार्टी ने जो नया 'डिजिटल ओवरसाइट बिल' प्रपोज़ किया है, उसने बहुत बड़ी कंट्रोवर्सी क्रिएट कर दी है। ऑपोजिशन पार्टीज और सिविल लिबर्टी ग्रुप्स दोनों ने इसकी जमकर क्रिटिसिज्म की है। ये बिल ऑनलाइन कंटेंट और टेक प्लेटफॉर्म्स पर कंट्रोल रखने के लिए एक नई रेगुलेटरी बॉडी बनाने की बात करता है, जिस पर आज पार्लियामेंट में काफी बहस हुई।
बिल के ऑपोनेंट्स का कहना है कि इसकी लैंग्वेज क्लियर नहीं है और इसके प्रोविजंस का मिसयूज़ हो सकता है, जिससे ऑनलाइन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पर रोक लग सकती है। एक सीनियर ऑपोजिशन लीडर ने तो यहाँ तक कह दिया, "ये रेगुलेशन नहीं, कंट्रोल की बात है," और प्रोटेस्ट करते हुए सेशन से वॉकआउट कर गए। वहीं, बिल के सपोर्टर्स का कहना है कि ये नेशनल सिक्योरिटी के लिए बहुत ज़रूरी है और सिटीजंस को हार्मफुल ऑनलाइन कंटेंट जैसे मिसइंफॉर्मेशन और हेट स्पीच से बचाएगा।
गवर्नमेंट का कहना है कि ये बिल इंडिया के डिजिटल लॉज़ को मॉडर्नाइज करने के लिए एक ज़रूरी स्टेप है, ताकि ऑनलाइन सेफ्टी के ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को फॉलो किया जा सके। लेकिन, जिस तरह का प्रोटेस्ट देखने को मिल रहा है, उससे लगता है कि बिल को पास कराना इतना आसान नहीं होगा। कई लोग फंडामेंटल राइट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए इसमें बड़े अमेंडमेंट्स की डिमांड कर रहे हैं। ये डिबेट अभी खत्म नहीं हुई है, और आने वाले हफ्तों में और भी गर्मागर्मी देखने को मिल सकती है।