गवर्नमेंट का 'डिजिटल इंडिया 2.0' प्लान, गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी होगी बेटर
इंडियन गवर्नमेंट ने 'डिजिटल इंडिया 2.0' लॉन्च किया है, जो उसके फ्लैगशिप प्रोग्राम का नया फेज है। इसका फोकस रिमोट रूरल एरियाज में हाई-स्पीड इंटरनेट एक्सेस बढ़ाना है। इस इनिशिएटिव का एम डिजिटल डिवाइड को कम करना और इनक्लूसिव ग्रोथ को सपोर्ट करना है।
न्यू दिल्ली – पूरे देश में डिजिटल इंक्लूजन के लिए एक बड़े स्टेप में, इंडियन गवर्नमेंट ने आज ऑफिशियली 'डिजिटल इंडिया 2.0' लॉन्च किया है। यह उसके सक्सेसफुल फर्स्ट फेज का एक एंबिशियस फॉलो-अप है। इस नए इनिशिएटिव का मेन फोकस अनसर्व्ड रूरल एरियाज में ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बढ़ाना है, जिसका टारगेट अगले तीन सालों में एक्स्ट्रा 100,000 गांवों को कनेक्ट करना है।
'डिजिटल इंडिया 2.0' के मेन कंपोनेंट्स में एडवांस्ड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क्स का डिप्लॉयमेंट, अफोर्डेबल स्मार्टफोन एक्सेस को प्रमोट करना, और एग्रीकल्चर, एजुकेशन और हेल्थकेयर नीड्स के लिए लोकलाइज्ड डिजिटल सर्विसेज का डेवलपमेंट शामिल है। गवर्नमेंट ने जोर दिया कि यह फेज रूरल कम्युनिटीज को एम्पावर करने, ई-गवर्नेंस को फैसिलिटेट करने और ग्रासरूट्स लेवल पर इकोनॉमिक ऑपर्च्युनिटीज को अनलॉक करने के लिए बहुत क्रिटिकल है।
एक्सपर्ट्स ने रूरल कनेक्टिविटी पर गवर्नमेंट के नए फोकस की तारीफ की है, और बताया कि इससे लोगों की लाइफ और लाइवलीहुड में बहुत बड़ा चेंज आ सकता है। हालांकि, लैंड एक्विजिशन, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और डिजिटल लिटरेसी जैसी चैलेंजेस अभी भी हैं। 'डिजिटल इंडिया 2.0' की सक्सेस काफी हद तक इफेक्टिव इम्प्लीमेंटेशन और इन प्रॉब्लम्स को ओवरकम करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप्स पर डिपेंड करेगी।