'डिजिटल प्राइवेसी बिल' पार्लियामेंट से पास, ऑपोजिशन में भारी टेंशन!
एक नया 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' आज पार्लियामेंट से पास हो गया है, जिससे ऑपोजिशन पार्टीज और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स काफी टेंशन में हैं। गवर्नमेंट का कहना है कि ये नेशनल सिक्योरिटी के लिए जरूरी है, लेकिन क्रिटिक्स इसे ज्यादा सर्विलांस पावर वाला बता रहे हैं। इस बिल से सिटीजंस के डेटा राइट्स पर बड़ा इम्पेक्ट पड़ने की उम्मीद है।
कई हफ्तों की इंटेंस डिबेट और गरम बहस के बाद, फाइनली 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' को पार्लियामेंट की अप्रूवल मिल गई है। रूलिंग पार्टी ने इस बिल को नेशनल सिक्योरिटी और ऑनलाइन डेटा को रेगुलेट करने के लिए एक जरूरी स्टेप बताया है, लेकिन ऑपोजिशन पार्टीज ने इसे मास सर्विलांस का टूल और फंडामेंटल राइट्स का वॉयलेशन कहा है।
इस बिल को पास करने के लिए एक मैराथन सेशन हुआ जिसमें कई अमेंडमेंट्स प्रपोज हुए पर रिजेक्ट कर दिए गए। बिल के सपोर्टर्स ने साइबर क्राइम और फॉरेन इंटरफेरेंस से निपटने के लिए एक स्ट्रॉन्ग लीगल फ्रेमवर्क की जरूरत पर जोर दिया, उनका कहना था कि डिजिटल ऐज के लिए करेंट लॉज इनसफिशिएंट हैं। उन्होंने पब्लिक को एश्योर किया कि नए लेजिसलेशन से मिली पावर्स के मिसयूज को रोकने के लिए प्रॉपर चेक एंड बैलेंस सिस्टम है।
पर, प्राइवेसी एडवोकेसी ग्रुप्स ने इस बिल को कोर्ट में चैलेंज करने की बात कही है, क्योंकि उन्हें इसकी ब्रॉड डेफिनिशंस और इंडिपेंडेंट ओवरसाइट की कमी पर कंसर्न्स हैं। अनाउंसमेंट के तुरंत बाद पार्लियामेंट बिल्डिंग के बाहर पब्लिक प्रोटेस्ट शुरू हो गए, जिसमें डेमोंस्ट्रेटर्स बिल को रिव्यू करने की डिमांड कर रहे थे। आने वाले हफ्तों में इसके इम्प्लीमेंटेशन को लेकर लीगल और पॉलिटिकल बैटल्स जारी रहने की उम्मीद है।