डिजिटल प्राइवेसी बिल पर पार्लियामेंट में बवाल, अपोजिशन पार्टीज ने किया वॉकआउट
गवर्नमेंट का नया 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' अपोजिशन पार्टीज और सिविल सोसाइटी के निशाने पर आ गया है। क्रिटिक्स का कहना है कि ये बिल गवर्नमेंट को बहुत ज्यादा पावर्स देता है, जिससे सिटीजन्स की प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है।
न्यू दिल्ली – पार्लियामेंट में आज पेश हुआ 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' एक बड़े पॉलिटिकल कॉन्ट्रोवर्सी का सेंटर बन गया है। अपोजिशन पार्टीज ने इस बिल के प्रोटेस्ट में वॉकआउट कर दिया। रूलिंग पार्टी इस बिल को नेशनल सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन के लिए इम्पोर्टेन्ट बता रही है, लेकिन क्रिटिक्स का कहना है कि इसके प्रोविजन्स बहुत ब्रॉड हैं और इनसे सिटीजन्स की फ्रीडम पर असर पड़ सकता है।
पार्लियामेंट के सोर्सेज से पता चला है कि कई टेक जायंट्स और एडवोकेसी ग्रुप्स इस बिल के कुछ क्लॉजेज को फिर से कंसीडर करने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। सबसे बड़ी प्रॉब्लम उस प्रोविजन को लेकर है जो गवर्नमेंट एजेंसीज को कुछ कंडीशन्स में पर्सनल डेटा एक्सेस करने की परमिशन देता है। अपोनेंट्स का कहना है कि इसमें प्रॉपर ओवरसाइट और ज्यूडिशियल सेफगार्ड्स नहीं हैं। हालांकि, गवर्नमेंट का स्टैंड है कि ये प्रोविजन्स साइबरक्राइम से डील करने और डिजिटल वर्ल्ड में नेशनल सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी हैं।
स्पीकर ने इस इश्यू को सॉल्व करने के लिए कल एक ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाई है, लेकिन अपोजिशन अपनी डिमांड पर अड़ा हुआ है कि बिल में बड़े अमेंडमेंट्स होने चाहिए। इस लेजिस्लेटिव बैटल का रिजल्ट कंट्री में डिजिटल राइट्स को रीडिफाइन कर सकता है और फ्यूचर टेक पॉलिसीज के लिए एक नया ट्रेंड सेट कर सकता है। पब्लिक ओपिनियन भी डिवाइडेड है, एक रीसेंट पोल में सिक्योरिटी के लिए सपोर्ट और प्राइवेसी लॉस को लेकर कंसर्न्स दोनों देखने को मिले हैं।