गवर्नमेंट ने 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' किया पेश, डिबेट्स हुई तेज
गवर्नमेंट ने आज एक नया 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' इंट्रोड्यूस किया है, जिसका मकसद सिटिजन्स के डेटा प्रोटेक्शन को स्ट्रॉन्ग करना है। इस बिल को लेकर पॉलिटिकल पार्टीज और टेक इंडस्ट्री में काफी डिबेट्स शुरू हो गई हैं।
आज गवर्नमेंट ने पार्लियामेंट में अपना मच-अवेटेड 'डिजिटल प्राइवेसी बिल' पेश किया है। यह बिल, जिस पर कई महीनों से काम चल रहा था, पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन के लिए एक स्ट्रॉन्ग फ्रेमवर्क बनाने का टारगेट रखता है। इससे इंडिविजुअल्स को अपने डिजिटल फुटप्रिंट पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा और कंपनीज व गवर्नमेंट एजेंसीज पर डेटा कलेक्शन और यूज के लिए स्ट्रिक्ट रेगुलेशंस लगेंगे।
बिल पर इनिशियल रिएक्शन्स मिक्स्ड रहे हैं। जहां सपोर्टर्स इसे डिजिटल एज में सिटिजन राइट्स को सेफगार्ड करने के लिए एक जरूरी स्टेप मानते हैं, वहीं अपोजिशन पार्टीज और कई टेक जाइंट्स जैसे क्रिटिक्स ने इसके पोटेंशियल ओवररीच और इंप्लीमेंटेशन की प्रैक्टिकल चैलेंजिस पर कंसर्न्स जताई हैं। उन्हें डर है कि यह इनोवेशन को रोक सकता है और बिजनेस के लिए अननेसेसरी कंप्लायंस बर्डन क्रिएट कर सकता है।
बिल के मेन प्रोविजन्स में मैंडेटरी डेटा ब्रीच नोटिफिकेशन्स, डेटा पोर्टेबिलिटी का राइट, और नॉन-कंप्लायंस के लिए सीवियर पेनल्टीज शामिल हैं। एक पार्लियामेंट्री कमिटी इस बिल को डिटेल में रिव्यू करेगी और पब्लिक फीडबैक भी लेगी, इससे पहले कि यह आगे लेजिस्लेटिव एक्शन के लिए बढ़े। इन डिबेट्स का आउटकम देश में डिजिटल प्राइवेसी के फ्यूचर को शेप देने में बहुत इम्पोर्टेन्ट होगा।