गवर्नमेंट ने पेश किया नया "डिजिटल प्राइवेसी एंड डेटा सिक्योरिटी बिल", पॉलिटिक्स में गरम माहौल
आज पार्लियामेंट में नया "डिजिटल प्राइवेसी एंड डेटा सिक्योरिटी बिल" पेश किया गया है, जिसका मकसद डेटा प्रोटेक्शन रूल्स को अपडेट करना है। इस बिल पर पॉलिटिकल पार्टीज और सिविल राइट्स ऑर्गेनाइजेशंस के बीच काफी बहस हो रही है, खासकर गवर्नमेंट के डेटा एक्सेस के प्रोविजन्स को लेकर।
सेंट्रल गवर्नमेंट ने आज लोकसभा में एक बड़ा "डिजिटल प्राइवेसी एंड डेटा सिक्योरिटी बिल" पेश किया है, जिससे इंडिया के डिजिटल लैंडस्केप में काफी चेंजेस आने वाले हैं। इस लॉ का मेन टारगेट डेटा प्रोटेक्शन, इंडिविजुअल प्राइवेसी राइट्स और टेक कंपनीज व गवर्नमेंट एजेंसीज के डेटा प्रोसेसिंग को रेगुलेट करना है। सपोर्टर्स का कहना है कि डिजिटल एज में सिटीजन्स को सेफ रखने के लिए ये बहुत इम्पोर्टेन्ट स्टेप है।
लेकिन, इस बिल पर काफी क्रिटिसिज्म भी हो रहा है। ऑपोजिशन पार्टीज और कई सिविल लिबर्टी ग्रुप्स ने कुछ क्लाउसेस को लेकर सीरियस कंसर्न्स उठाए हैं, जिनमें गवर्नमेंट को एनक्रिप्टेड डेटा एक्सेस करने और नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर प्राइवेसी सेफगार्ड्स को ओवरराइड करने की पावर्स दी गई हैं। उन्हें डर है कि इससे सर्विलांस बढ़ सकता है और फंडामेंटल राइट्स कम हो सकते हैं, इसलिए वे ज्यादा ट्रांसपेरेंसी और पार्लियामेंट्री ओवरसाइट की डिमांड कर रहे हैं।
रूलिंग पार्टी के सोर्सेज ने बिल के पास होने का कॉन्फिडेंस दिखाया है और इसकी नेसेसिटी को नेशनल सिक्योरिटी और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए इम्पोर्टेन्ट बताया है। पब्लिक कंसल्टेशंस भी होने की उम्मीद है, हालांकि टाइट लेजिस्लेटिव शेड्यूल से लगता है कि डिस्कशन प्रोसेस काफी फास्ट होगा। आने वाले वीक्स में इस पर और भी इंटेंस डिबेट्स देखने को मिलेंगी, क्योंकि देश सिक्योरिटी, इनोवेशन और इंडिविजुअल प्राइवेसी के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है।