इंडिया में नया ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर प्रोजेक्ट लॉन्च, साउथर्न स्टेट्स को फायदा!
इंडिया ने आज एक बहुत बड़ा "ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर" प्रोजेक्ट इनॉग्रेट किया है। ये साउथर्न स्टेट्स में रिन्यूएबल एनर्जी को बूस्ट करेगा और क्लाइमेट गोल्स के लिए अच्छा है।
नई दिल्ली – सस्टेनेबल डेवलपमेंट और एनर्जी इंडिपेंडेंस की तरफ एक बड़े स्टेप में, इंडिया ने आज अपने एंबिशियस "ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर" प्रोजेक्ट का फर्स्ट फेज ऑफिशियली लॉन्च कर दिया है। ये प्रोजेक्ट अभी साउथर्न स्टेट्स जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल पर फोकस करेगा। इसका मेन एम है एक स्ट्रॉन्ग ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना ताकि लार्ज-स्केल रिन्यूएबल पावर को जनरेशन सेंटर्स से कंजम्पशन हब्स तक पहुंचाया जा सके।
इस प्रोजेक्ट की इनिशियल फेज की कॉस्ट लगभग ₹25,000 करोड़ है। इसमें हजारों किलोमीटर की हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन लाइन्स इंस्टॉल की जाएंगी और नए सबस्टेशन्स भी बनाए जाएंगे। ये इंफ्रास्ट्रक्चर सोलर और विंड एनर्जी को नेशनल ग्रिड में आसानी से इंटीग्रेट करेगा, जिससे फॉसिल फ्यूल्स पर डिपेंडेंस कम होगी और कार्बन एमिशन भी कम होगा। प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने इनॉग्रेशन पर बोलते हुए इस प्रोजेक्ट की इम्पोर्टेंस को हाईलाइट किया, खासकर इंडिया के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी के टारगेट को अचीव करने के लिए।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से न सिर्फ इंडिया का रिन्यूएबल एनर्जी प्रोफाइल बूस्ट होगा, बल्कि कंस्ट्रक्शन और मेंटेनेंस में हजारों जॉब्स भी क्रिएट होंगी। इस प्रोजेक्ट को इंडिया की पेरिस एग्रीमेंट के प्रति कमिटमेंट और क्लीनर, ग्रीनर फ्यूचर के लिए उसकी ओवरऑल स्ट्रैटेजी का एक क्रिटिकल कंपोनेंट माना जा रहा है। कॉरिडोर के आगे के फेजेस को दूसरे रीजन्स में भी बढ़ाने का प्लान है, जिससे इंडिया ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन में एक ग्लोबल लीडर बन जाएगा।