टेक जायंट्स पर एंटीट्रस्ट स्क्रूटनी बढ़ी, नए रूल्स का डर!

Business2 hours agoSource: National Voice
टेक जायंट्स पर एंटीट्रस्ट स्क्रूटनी बढ़ी, नए रूल्स का डर!

दुनिया भर में बड़ी टेक कंपनीज पर रेगुलेटर्स की नजर है। नए एंटीट्रस्ट रूल्स आने वाले हैं, जिससे इन कंपनीज की मार्केट डोमिनेंस को चैलेंज मिल सकता है। इससे उनके ऑपरेशंस और फ्यूचर पर बड़ा इम्पैक्ट आ सकता है।

ग्लोबल टेक इंडस्ट्री एक बड़े रेगुलेटरी एक्शन के लिए तैयार हो रही है, क्योंकि दुनिया भर की गवर्नमेंट्स कुछ बड़ी डिजिटल कंपनीज की पावर को कंट्रोल करना चाहती हैं। यूएस, ईयू और एशिया में एंटीट्रस्ट बॉडीज अपनी इन्वेस्टिगेशन तेज कर रही हैं, उन प्रैक्टिसेज पर जो एंटी-कंपिटिटिव मानी जा रही हैं, जैसे मोनोपोलिस्टिक एक्विजिशन या अपने प्लेटफॉर्म्स पर अपनी सर्विसेज को प्रेफरेंस देना। पॉलिसीमेकर्स का मानना है कि डिजिटल इकोनॉमी की कॉम्प्लेक्सिटीज को हैंडल करने के लिए मौजूदा लॉज काफी नहीं हैं।

नए लेजिस्लेटिव प्रपोजल्स कई पार्लियामेंट्स में पास होने वाले हैं, जिनका एम डेटा प्राइवेसी, प्लेटफॉर्म इंटरऑपरेबिलिटी और छोटे कंपिटिटर्स के लिए मार्केट एक्सेस पर स्ट्रिक्ट रूल्स लाना है। इन चेंजेस से टेक कंपनीज को अपने बिजनेस मॉडल्स को चेंज करना पड़ सकता है, कुछ एसेट्स बेचने पड़ सकते हैं, या फिर स्ट्रक्चरल सेपरेशंस का सामना करना पड़ सकता है। इन्वेस्टर्स इन डेवलपमेंट्स को क्लोजली वॉच कर रहे हैं, क्योंकि इस अनसर्टेनिटी से स्टॉक वैल्यूएशन और फ्यूचर ग्रोथ पर इम्पैक्ट आ सकता है।

जहां टेक लीडर्स का कहना है कि उनके इनोवेशन से कंज्यूमर्स को फायदा होता है और स्ट्रिक्ट रेगुलेशंस प्रोग्रेस को रोक सकते हैं, वहीं नए लॉज के सपोर्टर्स का तर्क है कि हेल्दी कंपटीशन और कंज्यूमर चॉइस के लिए एक लेवल प्लेइंग फील्ड जरूरी है। आने वाले मंथ्स बहुत इम्पोर्टेंट होने वाले हैं, जो डिजिटल इकोनॉमी के लैंडस्केप को और टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस के रिलेशनशिप को रीशेप कर सकते हैं।