न्यू ग्लोबल क्लाइमेट पैक्ट पर टेंशन, बड़े नेशंस में एमिशन टारगेट्स पर डिसएग्रीमेंट!
एक इम्पोर्टेंट समिट में न्यू ग्लोबल क्लाइमेट पैक्ट पर बात हो रही थी, लेकिन अब प्रॉब्लम आ गई है। बड़े इंडस्ट्रियल नेशंस एमिशन कम करने के टारगेट्स पर एग्री नहीं कर पा रहे हैं, जिससे इस पैक्ट की इफेक्टिवनेस पर सवाल उठ रहे हैं।
जिनेवा – एक न्यू ग्लोबल क्लाइमेट पैक्ट को लेकर जो उम्मीदें थीं, वो अब कम होती दिख रही हैं। जिनेवा में चल रही बड़ी समिट में की नेशंस के बीच बहुत डिसएग्रीमेंट्स हुए हैं। इस पैक्ट का मकसद था वर्ल्ड को रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ तेज़ी से ले जाना और ग्रीनहाउस गैस एमिशन को कम करना, लेकिन कई इंडस्ट्रियल कंट्रीज ने इसके एमिशन रिडक्शन टारगेट्स की स्ट्रिंजेंसी और इक्विटी पर स्ट्रॉन्ग अपोज़िशन दिखाया है।
चाइना, इंडिया और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे नेशंस के डेलिगेट्स ने क्लाइमेट चेंज की अर्जेंसी को माना है, लेकिन रैपिड डीकार्बोनाइजेशन के इकोनॉमिक इम्प्लिकेशन्स पर टेंशन जताई है। खासकर डेवलपिंग नेशंस, रिच कंट्रीज से ज़्यादा फाइनेंशियल एड और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की डिमांड कर रहे हैं ताकि वे अपनी इकोनॉमिक ग्रोथ को बिना रोके एनवायर्नमेंटल कमिटमेंट्स को पूरा कर सकें। इन कोर इश्यूज पर कंसेंसस न होने से नेगोशिएटर्स को कॉन्फ्रेंस खत्म होने से पहले एक मिडल ग्राउंड ढूंढने में काफी प्रॉब्लम आ रही है।
एनवायर्नमेंटल एक्टिविस्ट्स और साइंटिस्ट्स ने काफी डिसअपॉइंटमेंट शो किया है, उन्होंने वॉर्न किया है कि कोई भी डाइल्यूटेड एग्रीमेंट बढ़ते क्लाइमेट क्राइसिस को इफेक्टिवली एड्रेस नहीं कर पाएगा। टाइम तेज़ी से निकल रहा है, और एक यूनिफाइड, एंबिशियस अप्रोच के बिना, वर्ल्ड ग्लोबल वार्मिंग को लिमिट करने के लिए क्रिटिकल डेडलाइंस मिस कर सकता है, जिससे इरिवर्सिबल एनवायर्नमेंटल डैमेज हो सकता है। आगे की टॉक्स शेड्यूल हैं, लेकिन एक रियली इफेक्टिव ग्लोबल क्लाइमेट पैक्ट का रास्ता अभी भी बहुत मुश्किलों से भरा है।